शनिवार 11 अप्रैल 2026 - 12:04
शहीद इमाम ख़ामनेई र.ह.पूरी ईरानी जनता को अपनी संतान मानते थे और उनके लिए दुआ करते रहते थे

हौज़ा / इस्लामी क्रांति के नेता के कार्यालय ने एक बयान में कहा है कि शहीद इमाम हज़रत आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामनेई पूरी ईरानी जनता को अपनी संतान की तरह समझते थे और हमेशा उनके लिए दुआ करते थे।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , इस्लामी क्रांति के नेता के कार्यालय ने एक बयान में कहा है कि शहीद इमाम हज़रत आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामनेई पूरी ईरानी जनता को अपनी संतान की तरह समझते थे और हमेशा उनके लिए दुआ करते थे।

बयान में जनता के विभिन्न वर्गों द्वारा लगातार किए जा रहे संपर्कों और उनके दुख व पछतावे का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि कुछ लोग शहीद के जीवनकाल में दुश्मन के झूठे और भटकाने वाले मीडिया प्रोपेगंडे से प्रभावित होकर अनुचित रुख अपनाते थे या कभी-कभी बेअदबी  कर बैठते थे, जिस पर अब वे पछताते हैं और माफ़ी माँगने का अवसर न मिलने पर परेशान हैं।

बयान में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि ऐसे सभी लोग आश्वस्त रहें, क्योंकि शहीद इमाम ख़ामनेई पूरी ईरानी जनता को अपनी संतान की तरह समझते थे और हमेशा उनके लिए दुआ करते थे।

बयान का पूरा पाठ इस प्रकार है:

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

प्यारी, सम्मानित, स्वतंत्र और बहादुर ईरानी जनता के नाम:

समाज के विभिन्न वर्गों से संबंध रखने वाले लोगों ने कार्यालय से संपर्क कर गहरे दुख और पछतावे का इज़हार किया है कि वे दुश्मन के झूठे और भटकाने वाले मीडिया के प्रभाव में आकर महान रहबर, शहीद इमाम आयतुल्लाह ख़ामनेई की शान में अनुचित रुख अपना बैठे या कभी-कभी बेअदबी कर बैठे, और अब तक माफ़ी नहीं माँग पाए हैं। इस संबंध में वे मार्गदर्शन चाहते हैं।

इस संदर्भ में स्पष्ट किया जाता है कि शहीद इमाम ने अपने जीवनकाल में कई अवसरों पर कहा करते थे कि:

पूरी ईरानी जनता मेरी संतान है, मैं उनके लिए दुआ करने वाला हूँ, और ऐसे लोगों को मैंने माफ़ कर दिया है, मैं उनसे राज़ी हूँ और आगे भी उनके लिए दुआ करता रहूँगा।

ऐसे सभी लोग आश्वस्त रहें कि वे इस दयालु हृदय की क्षमा में शामिल हैं, जो सागर की तरह पूरी जनता को अपनी गोद में समेटे हुए था। इस रज़ामंदी की निशानी आज जनता की एकजुट, उत्साहपूर्ण और दुश्मन को नष्ट करने वाली मौजूदगी में स्पष्ट दिखाई देती है, जहाँ परमात्मा ने अपनी कृपा से सभी दूरियाँ मिटा दी हैं, और सभी लोग "अल्लाहु अकबर" के नारे के साथ सत्य के झंडे को बुलंद किए हुए हैं।

ऐ लोगो! अल्लाह पर भरोसा रखो, आपसी एकता, सद्भाव और संजीदगी के साथ दुष्ट मानव-दुश्मन पर विजय के अलावा किसी और चीज़ की चिंता न करो। स्थिर रहो और यकीन रखो कि ईरान के इतिहास के शहीदों की दुआएँ तुम सब के साथ हैं और आगे भी रहेंगी, और यही स्थिरता अल्लाह की मदद और निकट आने वाली जीत की शुभ सूचना है, जैसा कि अल्लाह का कथन है:

اِن تَنصُرُوا اللهَ یَنصُرکُم وَیُثَبِّت اَقدامَکُم۔
यदि तुम अल्लाह की मदद करोगे तो वह तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हारे कदम जमाए रखेगा)।

इस्लामी क्रांति के नेता का कार्यालय

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